Monday, August 31, 2009
इख्फ़ा-ए-मुहब्बत
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तुम मोहब्बत को छुपाती क्यों हो? हाय! ये हीर की सूरत जीना मुंह बिगाडे हुए अमृत पीना कांपती रूह धड़कता सीना जुर्म फितरत को बनाती...
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Saturday, August 29, 2009
लाइफ इज अ सर्च
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दा...दा...दा...करके बोलना शुरू भी नहीं किया कि एक तलाश साथ हो चली। पूरे घर में कुछ न कुछ ढूंढते फिरना। कभी कुछ गिराना, कुछ उठाना। कुछ चीजों...
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Monday, August 24, 2009
कुछ, जिसका है इंतजार
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केदारनाथ सिंह कुछ जिसे डाकिया कभी नहीं लाता कुछ जो दिन भर गिरता रहता है मकानों की छतों से धूल की तरह. कुछ-जिसे पकडऩे की जल्दी में बसें छू...
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Saturday, August 22, 2009
सदी का सबसे बड़ा आदमी-५ अन्तिम किश्त
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काशीनाथ सिंह- ................. बुड्ढे, जब सारे लोग चले गये और कोई नहीं रह गया, तो शौक साहब बोले, तैने अपने बेटे की कीमत नहीं जानी बुड्ढे! ...
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Friday, August 21, 2009
सदी का सबसे बड़ा आदमी- 4
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काशीनाथ सिंह ............इस ऐलान को करते हुए उनकी आंखों में आंसू थे और वे आंसू गालों पर ढुलक-ढुलक आ रहे थे कि वे तब तक किसी पर नहीं थूकेंग...
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