Tuesday, November 21, 2023

बात एक रोज की

फोटो- नितेश शर्मा 

'तुम्हारी मुट्ठी में क्या है? बताओ न? दिखाओ न? दिखाओ न...'  कहते हुए लड़की लड़के की मुट्ठी खोलने को जूझ रही थी। जैसे जैसे लड़की मुट्ठी खोलने को उत्सुक हो रही थी लड़का मुट्ठी कसता जा रहा था। आखिर लड़की थक गयी और फिर रूठ गई,'जाओ मुझे देखना ही नहीं।' कहकर उसने पीठ लड़के की तरफ कर दी। उसकी पीठ पर नीम के पेड़ से छनकर आती हुई चाँदनी कुछ इस तरह गिर रही थी जैसे किसी ने चाँदनी के छींटे बिखेर दिये हों।  लड़के ने उसकी पीठ को देखा और मुस्कुरा दिया। 

तू नहीं जानती नाराज होकर तूने कितना एहसान किया मुझ पर...लड़के ने सिगरेट के मुहाने पर उग आई राख़ को आहिस्ता से झाड़ते हुए कहा। लड़की ने पलटकर कहा, 'मैं तेरी बातों में नहीं आने वाली।' उसके यूं पलटने का असर यह हुआ कि चाँदनी के छींटे अब उसके सर पर झरने लगे। लड़का मंत्रमुग्ध उसे देख रहा था। चाँदनी लड़की पर बिखर रही थी। रातरानी की खुशबू इस जादू को आँखें मलते हुए देख रही थी। रात का तीसरा पहर था और धरती का यह कोना अल्हड़ इश्क़ के इत्र की ख़ुशबू से महक रहा था। 

लड़के ने मुट्ठी लड़की के आगे कर दी। 'लो...' लड़की ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, 'जब देना ही होता है तो क्यों करता है तू ऐसा?' 
'यह तू नहीं समझेगी।' कहकर लड़का नीम के पेड़ की उन शाखों को देखने लगा जहां से चाँदनी के बूटे खिल रहे थे और लड़की के देह पर बिखर रहे थे। 
लड़की ने मुट्ठी खोली। इस बार मुट्ठी आराम से खुल गयी। 
'अरे ये तो खाली है, मुझे बुधधू बना रहे थे।' लड़की ने लड़के को घूरते हुए कहा।
'खाली नहीं है ये, ध्यान से देखो।' 
लड़की ने खाली हथेली को उलट-पुलट कर देखा उसे कुछ भी नज़र नहीं आया। 
लड़का मुस्कुरा दिया। 'इसमें एक सपना है, एक पेड़ का सपना। गुलाबी फूलों वाला एक पेड़ एक छोटे से घर के सामने ।'  
लड़की की आँखें छलक पड़ीं। ऐसी ही किसी चाँदनी रात में एक रोज उसने अपना एक सपना लड़के को बताया था। एक छोटा सा घर, सामने नदी और गुलाबी फूलों से भरा एक पेड़। लड़के ने उस सपने को सहेज लिया था।

'सुनो, मेरा रिजल्ट आ गया है. सिलेक्शन हो गया। अगले महीने ज्वाइन करना है' लड़के ने लड़की के आगे अपनी हथेली को फैलाते हुए कहा। 
'ओह, तो इस मुट्ठी में तुम्हारे जाने की खबर है?'  लड़की की खुशी में उदासी घुल गयी थी। 
नहीं, जाने की नहीं हमारे साथ होने की। 
कैसे? लड़की ने अपनी आँखें लड़के की आँखों में उतार दीं। 

लड़का चुप रहा। कुछ देर बाद उसने बस इतना कहा, ' गुलाबी फूलों वाला पेड़?' 
लड़की समझ चुकी थी। लड़का अपने साथ जीवन भर चलने का प्रस्ताव लाया था। 
लड़की की नीली आँखों में भरोसे की बदलियाँ उतर आयीं। 
उसने बहुत प्यार से लड़के की हथेली को चूमा और उसे वापस बंद कर दिया। 
'तुम बहुत प्यारे हो। लेकिन तुम्हें मेरे सपने समेटने की जरूरत नहीं बस कि तुम साथ रहो मैं अपने सपने खुद सहेज लूँगी।' 
'तुम और मैं क्या अलग हैं?' लड़के की उदास आवाज़ में सुबह की अज़ान घुलने लगी थी। 
'हाँ, हम दोनों अलग हैं। प्यार में होना खुद को खो देना नहीं होता, खुद को पाना होता है। तुम हो तो मुझे मेरे सपनों पर यक़ीन होता है। मुझे मेरे सपनों को जीने दो और तुम अपने सपनों को जियो न।' 
'तो तुम साथ नहीं आओगी?' 
'आऊँगी, पर अभी नहीं। अभी मुझे मेरे सपनों की नींव रखनी है।' 
'तुम इतनी जिद्दी क्यों हो?'  लड़का तनिक खीझने लगा था। 
'सदियाँ लगाई हैं जिद करना सीखने में...' लड़की मुस्कुरा दी। नीम का फूल उसके कांधे पर आ गिरा था। 
लड़का उठने को हुआ तो लड़की ने उसे रोक लिया। 
चलो न एक नया सपना देखते हैं, हम दोनों का सपना। 
लड़की ने अपनी बंद हथेली उसके सामने की और कहा, खोलो। 
लड़के ने हथेली खोली और मुस्कुरा दिया, अब बताओ भी। 
'दिखी नहीं तुम्हें तुम्हारी वो बाइक जो मेरे उस गुलाबी पेड़ के नीचे खड़ी है।'
दोनों खिलखिलाकर हंस दिये। 

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