Monday, September 19, 2022
हाँ, तुमसे मोहब्बत है...
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सोचा था खामोश रहूंगी. कुछ न कहूँगी. और सच खामोश ही हूँ अरसे से. ज़िन्दगी अपने तमाम रंग और मौसम लिए मुझ पर उतर रही है. अचानक बैठे-बैठे कोई मुस...
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Sunday, August 28, 2022
रूमर्स ऑफ स्प्रिंग- फराह बशीर
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वीकेंड जैसा कुछ कभी फील नहीं हुआ. हाँ, कभी इतवार का कोई सिरा हाथ में मिला तो उस सिरे पर अटके सुख को अकोर लिया. 'लोग जो मुझ में रह गए...
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झिंझोड़ के जगाती हैं जसिंता की कवितायें...
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- Pratibha Katiyar जब मेरा पड़ोसी मेरे खून का प्यास हो गया मैं समझ गया राष्ट्रवाद आ गया. --- वे हमारे सभ्य होने के इंतजार में हैं और हम उनके ...
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Sunday, August 21, 2022
ये दाग-दाग उजाला...
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उदास होना बुरा नहीं. मैं खुद अपने कंधों पर अपनी उदासी को रोज लादती हूँ और उसे दूर कहीं फेंक आने को निकल पड़ती हूँ. लेकिन इस कोशिश में खुद को ...
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Wednesday, August 17, 2022
इस समाज को बदलना नहीं, फूंकना पड़ेगा...
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'लोग जो मुझमें रह गए' किताब ने इन दिनों मुझे थाम रखा है. मैं अच्छी लगने वाली किताबों को धीमे पढ़ती हूँ. मन में एक डर होता है कि कहीं ...
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