Wednesday, July 29, 2020
खिलना और झरना
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उगना ही झरना है, सुबह ही शाम है, रात ही में दिन छुपा है, उदासी सुख का ही दूसरा रूप है. जब फूल को देखते हैं तब हमें जड़ें नहीं दिखतीं. यह जड़ें...
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Sunday, July 26, 2020
मारीना- मुलायम दिल की दास्ताँ
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(26 जुलाई को डेली न्यूज़ में प्रकाशित )
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Saturday, July 25, 2020
सत्ता गई, कवयित्री बची रही
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- प्रियदर्शन बीसवीं सदी के शुरुआत में उभरी रूसी कवयित्री मारीना त्स्वेतायेवा का जीवन बहुत त्रासद रहा। वह एक कुलीन परिवार में जन्मी, भावावेग...
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Sunday, July 19, 2020
नींद
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आधी गोली पूरी नींद का चक्कर लगाने के बाद घुटने टेक देती है पूरी गोली आधी नींद से दोस्ती कर सुस्ता लेती है बची हुई आधी नींद भटकती ...
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Friday, July 17, 2020
हत्या से पहले का आत्म
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कुछ कहना चाहती हूँ फिर लगता है सब कहा जा चुका है तो सब कहे जा चुके को सुनने पर ध्यान लगाती हूँ और ध्यान बिना कहे हुए को सुनने की ओर...
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