Friday, October 25, 2019
निर्मल वर्मा स्मृति- बीतकर भी कहाँ बीतता है कुछ
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बीतता अक्टूबर पलटकर देख रहा है. सुबह के छह बजे हैं. यह निर्मल वर्मा की सुबह की चाय का वक़्त है. मेरे पास एक प्याला चाय है और हैं निर्मल ...
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Friday, October 18, 2019
ये दुनिया तुमसे सुंदर है
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इन दोनों ने मुझे संभाल रखा है, मेरा घर संभाल रखा है. ये सोनू और सोनम हैं. एक ने स्वाद का जिम्मा लिया है भूख का जिम्मा लिया है दूसरी ने ...
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Sunday, October 13, 2019
स्काई इज़ पिंक
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'अगर तुम्हारा स्काई पिंक है तो वो पिंक ही है. किसी के कहने से तुम अपने स्काई का कलर मत बदलना. जो टीचर कहती है कि तुमने स्काई का कलर ग...
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Thursday, September 26, 2019
ये दुनिया तुमसे सुंदर है
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जब ये कक्षा 6 में थीं तब इनसे मुलाकात हुई थी. पहली बार. फिर इनसे दोस्ती हो गयी. फिर दोस्ती गाढ़ी होती गयी. अब ये कक्षा 8 में हैं. हम बाते...
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Thursday, September 19, 2019
थोड़ा सा उगने लगी हूँ
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गृह प्रवेश कराने को कोई दरवाजे पर धान का कटोरा भरकर, रंगोली का थाल सजाकर नहीं बैठा था. किसी ने दरवाजे पर हथेलियों की थाप नहीं ली. कोई इ...
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