Sunday, October 28, 2018
'क' से कविता एक सुंदर मीठी सुबह से दिन का आगाज़
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अक्टूबर में उतरता है मौसम हथेलियों पर, कन्धों पर, धरती पर. अक्टूबर में इंतजार शुरू होता है वादियों के शगुनों वाली बर्फ से भर जाने का, नाउ...
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Thursday, October 25, 2018
कोई हमें सताये क्यों
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दिल ही तो है न संग-ओ-ख़ीश्त दर्द से भर न आये क्यों रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताये क्यों दैर नहीं हरम नहीं दर नहीं आस्ताँ नहीं...
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Wednesday, October 24, 2018
कहानी- पंख वाली खिड़कियाँ
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दिनों को जैसे पंख लगे रहते हैं हरदम. इनसे कितनी भी होड़ करो ये पीछे छूटने को तैयार ही नहीं होते. दिनों से होड़ करना अब रीना का खेल हो चु...
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साढ़े चार मिनट
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कमरे में तीन ही लोग थे। वो मैं और एक हमारी दोस्त...। तीनों ही मौन थे। मैं वहां सबसे ज्यादा थी या शायद सबसे कम। वो वहां सबसे कम था ...
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Friday, October 19, 2018
नदी, उदासी, इश्क
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उस रोज जब तुम्हारी निगाह में बुझ रहा था प्रेम आसमान में बुझ रहा था चाँद नदी बूझ रही थी इस बुझ जाने की कहानी. ---- नदी किनार...
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