Friday, June 29, 2018
खलिया टॉप के बहाने रामगंगा घाटी की पुरानी याद- भास्कर उप्रेती
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भास्कर उप्रेती विकट यायावर हैं. यात्रायें उनके रग-रग में समायी हैं. मानो जिन्दगी की हर मुश्किल का हल उन्हें यात्रा में मिलता हो. हर ...
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Thursday, June 28, 2018
विलम्बित लय में गूंजती है बारिश की आवाज
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एक चुप सी लगी है. इस चुप में सुख है. बड़ी मशक्कत से इस चुप तक पहुंचना हो पाता है. इसे सहेजने के जतन में कई बार घबराहट होती है. कहीं कोई चू...
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Tuesday, June 26, 2018
वो ख़्वाब जो बरस रहा है...
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रात का किवाड़ खटखटाती है तुम्हारी आवाज की उजली किरन पपीहे की टेर लगती है राग भैरवी सी रात झरे हरसिंगार से सजी है धरती तुम्हारी ...
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Thursday, May 31, 2018
जिन्दगी की कश्मकश से रू-ब-रू कराती कवितायें
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- प्रतिभा कटियार यूँ तो समूचा जीवन ही कविता है लेकिन जीवन में कविता कहाँ टकराएगी पता नहीं. यह कविताओं का तूफानी दौर मालूम होता है. ...
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Wednesday, May 30, 2018
रेखा चमोली की डायरी के साथ एक यात्रा
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यह 2012 की याद को पलट के देखना है. उस रोज जब मुठ्ठियों में 20 मई का दिन था और सामने उत्तरकाशी का रास्ता. अगर स्मृति दोष नहीं है तो संभवत...
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