प्रतिभा की दुनिया ...
Saturday, January 30, 2016

घर से भागने वाली लड़कियां

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एक रोज लड़कियां तमाम ख्वाहिशें तह करके करीने से सूटकेस में लगाती हैं कच्चे-पक्के ख्वाब रखती हैं साथ में हिम्मत रखती हैं सबसे ऊपर वाली...
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Monday, January 25, 2016

'आखिरी' लिखने से पहले...

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'आखिरी' लिखने से पहले घूमता है समूचा जीवन आँखों के सामने ख्वाहिशों का एक सैलाब दौड़ता है रगों में बचपन की कोई शाख हिलती है धीमे से...
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Monday, January 18, 2016

पलटकर देखा तो होगा जिंदगी तुझको...

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जाते वक़्त उसने क्या जिंदगी को पलटकर न देखा होगा? कितनी आवाजों की छुअन को महसूस किया होगा उसने, कितने लम्हों को टटोला होगा। भीतर के, बाहर ...
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Tuesday, January 12, 2016

इश्क़ नमक भर, बस...

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'मैं तुम्हें प्यार करती हूं, जिस तरह किसान करता है प्यार अपनी फसलों को। मां अपने बच्चे को, प्यास पानी को, मछली नदी को। मैं तुम्ह...
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Friday, January 1, 2016

हम तुझे बीतने नहीं देंगे...

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कैलेण्डर के आखिरी पन्ने से गप्प लगाते लगाते कब नींद लगी पता ही  नहीं चला. ये लम्हों से गुफ्तगू के दौरान लम्हों का हमें जवाब का एक ढब है...
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Pratibha Katiyar
A journalist,writer and always a learner
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