Tuesday, November 14, 2017

जब टूटता है दिल


टूटना
पहाड़ तब नहीं टूटता
जब पहाड़ टूटता है
पहाड़ तब टूटता है
जब टूटता है दिल.

भरना
दिल भर आने से नहीं भर आतीं
सूखी नदियाँ
पोखर
कुएं
बावडी
इनके सूखेपन से
भर आता है दिल.

3 comments:

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15-11-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2789 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Purushottam kumar Sinha said...

दार्शनिक अभिव्यक्ति.....

Kavita Rawat said...

बहुत सुन्दर