Tuesday, March 21, 2017

जीने से भी ज्यादा जियूँगी


सफर फिर पांव में बंधा है. साथ बंधा है अकेलापन भी. सफर से पहले कितना कुछ समेटना होता है. सफर पूरा होने पर कितना कुछ होता है करने को. लेकिन सफर के ठीक बीच में राहत के सिवा कुछ भी नहीं. लोगों का रेला है, रेल है खुद से मेल है. हरी सुरंग के बीच से गुजरते हुए, पहाड़ों पे हाल में गिरी बर्फ की तासीर हथेलियों पे लिए रेगिस्तान की तरफ का रुख किया है. रुख किया है असल में अपनी ओर. न जाने कितना सूखा भर गया है पिछले दिनों. बारिशों की लड़ियों से खेलते हुए भी, चितचोर चैत से लाड़ लड़ाते हुए भी, शायद खुद से लड़ते-लड़ते थकने लगी हूँ. जिंदगी से लड़ते-लड़ते ऊबने लगी हूँ. 

खैर, सफर है, आराम है...साथ कोई नहीं. इसका भी सुख है. कभी-कभी किसी का न होना भी कितना ज़रूरी होता है. वैसे कोई कभी भी कहाँ होता है, होने के तमाम वहम ही तो होते हैं.

सफर मोहक है हमेशा की तरह. खाना है, भूख नहीं, पानी है प्यास नहीं. बर्थ है नींद नहीं। बस छूटते हुए रास्तों को देखने का सुख है. जिंदगी जीने की तलब है. यूँ हारना अच्छा नहीं लगता, थकना अच्छा नहीं लगता. तरकीबें भिड़ाती रहती हूँ. धूमिल की कवितायेँ साथ हैं... दिन के बीतने और रात के करीब आने के बीच हथेलियों में इंद्रधनुष खुलता है. नागेश कुकनूर की फिल्म 'धनक.' कबसे लिये फिर रही हूँ, लेकिन देखने की फुर्सत और इच्छा दोनों का मेल होने के इंतज़ार में हूँ. फिल्म खत्म हो चुकी है... बस इतना कह सकती हूँ कि एक बार फिर नागेश से प्यार हो गया है. पूरी फिल्म सुख में डुबो चुकी है. मैं फ़िल्में देखते हुए खूब रोती हूँ. धनक पूरे वक़्त आँखें भिगोये रखती है. सुख का रुदन, जिंदगी में डूबने का सुख...

नागेश के लिए मन में शृद्धा जागती है. कितनी बारीक नज़र है और कितना सादा सा संवेदनशील दिल. पिछले किसी सफर में नागेश की ही 'लक्ष्मी' देखी थी आज तक सिहरन महसूस होती है और आज ये धनक....मीठी सी मासूम सी फिल्म. शाहरुख़ तुम पर कभी दिल-विल आया नहीं मेरा लेकिन धनक में तुम नहीं होकर भी दिल चुरा ले गए...

हाँ नागेश, जीने से भी ज्यादा जियूँगी मैं, उड़ानों से भी आगे उडूँगी...पक्का प्रॉमिस...

( सफर, इश्क़ शहर से गुलाबी शहर )

5 comments:

Sanju said...

साथॆक प्रस्तुतिकरण......
मेरे ब्लाॅग की नयी पोस्ट पर आपके विचारों की प्रतीक्षा....

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 23-03-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2609 में दिया जाएगा
धन्यवाद

Anita said...

सफर में देखी फिल्म और उमड़े जज्बात..बेहद खूबसूरती से आपने फिल्म की समीक्षा की है..

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’क्या वीरों की आज कूच करने की तैयारी है? ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

Tejkumar Suman said...

कितना अच्छा सफर रहा।