Tuesday, December 22, 2015

आप इसकी हड्डी तोड़ दीजिये...



(पैरेंट टीचर मीटिंग )
दृश्य-एक 
पिता(गुस्से में फुफकारते हुए )- 'मैम  आप इसकी हड्डी तोड़ दीजिये। दिमाग ख़राब है. २० में से १२ नंबर?  हद है. नाक कटा दी है इसने हमारी सोसायटी में'.
माँ - शहर के इत्ते महंगे स्कूल में पढ़ा रहे हैं. इतनी फीस दे रहे हैं. और नतीजा ये ? मैडम ये कोई बात नहीं होती।
मैम(शांत भाव से )- आप लोग ज्यादा ही परेशान हैं. बच्चा ठीक है. क्लास में अच्छा कर रहा है. नंबर भी बुरे नहीं हैं. अगली बार और अच्छा करेगा। है न बेटा?
पिता - क्या बात कर रही हैं आप? आप तो इसे और बिगाड़ रही हैं. ये अच्छे नंबर हैं ?(एक थप्पड़ बेटे को लगाते हुए. बच्चा आठवीं का है)
मैडम- अरे सर क्या कर रहे हैं. ऐसे सबके सामने बच्चे को नहीं मारते। वो अच्छा बच्चा है. आप फ़िक्र न करें। शायद एग्जाम में डर जाता होगा इसलिए नंबर कम आते हों.
पिता- डर ? डर जाता है? मर्द होकर डर जाता है ? फिर तो इसे पैदा ही नहीं होना चाहिए। कमबख्त। (गुस्से में उठ खड़े पिता बच्चे को एक और थप्पड़ लगाते हैं )
माँ- छोटा बेटा देखिये मेरा। वो देखिए कित्ते प्यार से खड़ा है. सब सब्जेक्ट में अव्वल आता है. और एक ये है.
मैडम- देखिये सब बच्चे अलग होते हैं. तुलना मत करिये। मैं संभाल लूंगी। है न बेटा ? हम दोनों मिलकर सब ठीक कर लेंगे न? (मैम बच्चे को सहेजने की कोशिश करती हैं ).
पिता- आप क्या संभाल लेंगी। हुंह। मैं मैनेजमेंट से शिकायत करूंगा आप लोगों की. बच्चो की गलत चीज़ो को बढ़ावा देते हो आप लोग. (गुस्से में क्लास से बाहर चले जाते हैं)

दृश्य- दो 
माँ- कितनी बिगड़ गयी है ये आप लोग कुछ करते क्यों नहीं? सारी कॉपी खाली पड़ी हैं?
सर- क्या करें आपकी बेटी है ही इतनी लापरवाह। कोई काम टाइम पे नहीं करती। सुनती ही नहीं।
माँ - तो आप थप्पड़ लगा दिया करो न. कित्ता पैसा फूंक रहे हैं इसके ऊपर. और ये पढ़ के ही नहीं दे रही.
सर- वाकई ये बहुत बद्तमीज है.(बच्ची से) क्या चाहती हो पीटना शुरू करूँ?
माँ- अब आप इससे पूछेंगे? मैं कह रही हूँ आपसे। ठोंकिये, पीटिए कुछ भी करिये। मुझे इसका रिजल्ट चाहिए बस.
(बच्ची क्लास सेवन की है )

दृश्य- तीन

टीचर- आपकी बेटी का ध्यान ही नहीं रहता क्लास में. मैं इसके बारे में क्या बताऊँ? नाक में दम करके रखा है इसने।
माँ(मुस्कुराकर कर )- अच्छा? ये तो बहुत अच्छी बात है।
टीचर- ये क्या कह रही हैं आप?
माँ- बिलकुल। हर सब्जेक्ट  के टीचर्स यही कहते हैं कि बड़ी सिंसियर है आपकी बेटी। सुन सुन के बोर हो गयी हूँ मैं तो. अब जबकि आप बोल रहे हैं कि  नाक में दम करके रखा है तो सुख की ही तो बात है. बच्चा नार्मल है यानी।
टीचर- अजीब माँ हैं आप? आपकी बेटी मैथ्स में फेल है फिर भी.
माँ- वो सब्जेक्ट में फेल हो तो हो जिंदगी में उसे अव्वल आना ज़रूरी है. रही बात सब्जेक्ट की तो वो नहीं मैं और आप फेल हैं. एक बात बताइये, आप मेरी बेटी के दोस्त हैं क्या?
टीचर- क्या? दोस्त? देखिये ये किताबों और फिल्मों में ही अच्छा लगता है. ३५ उजड्ड बच्चों को सम्भालना पड़े तो सब दोस्ती निकल जाये।
माँ - चलिए, आपकी मर्जी। मत बनिए दोस्त लेकिन मेरी बेटी की गणित से दोस्ती तो आपको ही करानी होगी। क्योंकि बिना विषय से दोस्ती किये कोई बच्चा उसे कैसे एन्जॉय करेगा। और बिना एन्जॉय किये नंबर तो आ सकते हैं लेकिन विषय से दुश्मनी जिंदगी भर की तय है. मुझे नंबर नहीं मेरे बच्चे की विषय से दोस्ती चाहिए। और ये तो आपको करना ही पड़ेगा।

(किसको कहाँ- कहाँ बदलना बाकी है.... सफर अभी बहुत तय करना है... )

2 comments:

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24-12-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2200 में दिया जाएगा
धन्यवाद

रश्मि शर्मा said...

Bahut sahi likha...hame aise hi do-char hona padta hai school me kai bar.