Sunday, October 11, 2015

प्यार का पता नहीं लेकिन...



हम दोनों ही अपने रास्ते खो चुके थे
और नए रास्ते तलाश रहे थे

हम दोनों बहुत थक गए थे
लेकिन हारे नहीं थे

हम दोनों उदास थे
और मुस्कुराहटें ढूंढ रहे थे

हमारी त्वचा पे उभर आई झुर्रियों में
किसी रिश्ते का नाम नहीं था

हम दोनों खो गए थे खुद से
लेकिन एक-दुसरे को थामे हुए थे

हमारे भीतर थोड़ी सी मृत्यु शेष थी
और एक पूरा जीवन

प्यार का पता नहीं
लेकिन कुछ था हमारी हथेलियों में
रेखाओं के अलावा...

2 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 13 अक्टूबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

GathaEditor Onlinegatha said...

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