Friday, September 18, 2015

प्यार - 4



जैसे फूल के इर्द-गिर्द
बुन जाता है कोई जाला

वैसे ही प्रेम के इर्द गिर्द
जमा हो जाती है थोड़ी सी उदासी...


5 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-09-2015) को  " माँ बाप बुढापे में  बोझ क्यों?"   (चर्चा अंक-2103)  पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Dayanand Arya said...

क्या खूब बात कही है आपने

dr.mahendrag said...

सुन्दर अभिव्यक्ति

Onkar said...

बहुत बढ़िया

Jagruktimes said...

अच्छी हैं जी.Jagruk Times