Tuesday, September 15, 2015

प्यार -2



रंग थे
खुशबू थी
तितलियाँ नहीं

बादल थे
बारिश थी
धरती नहीं

रास्ता था
राहगीर थे
मंज़िल नहीं

स्वर थे
साज थे
संगीत नहीं

रात थी
ख्वाब थे
नींद नहीं

तुम थे
हम थे
प्यार नहीं...


1 comment:

Dilbag Virk said...

आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 17-09-2015 को चर्चा मंच के अंक चर्चा - 2101
में की जाएगी
धन्यवाद