Monday, September 23, 2013

किसी से न कहना


सुनो, अरे सुनो तो....राघव हांफते हुए काजल के पीछे भाग रहा है.
काजल पलटकर देखती है. खिलखिलाकर हंसती है और फिर भागने लगती है. दम है तो जीतकर दिखाओ. वो चिल्लाकर कहती है. राघव पेट पकड़कर बैठ जाता है.
जा तू, मैं तुझसे नहीं बोलता. तू ही जीत जा. सर की चमची.
मैं सर की चमची....मैं सर की चमची....गुस्से में चिल्लाते हुए काजल राघव के पास आती है और उसे एक तमाचा मारती है. राघव दर्द से कराह उठता है. काजल और मारती है. 
माफ कर दे रे काजल, तू नहीं मैं सर का चमचा...
ठीक से माफी मांग. काजल कमर पे हाथ रखकर खड़ी हो जाती है.
राघव कान पकड़कर माफी मांगता है.
सुन....राघव काजल से कहता है
तू ना, किसी को बताना मत कि तूने मुझे मारा है.
क्यों...काजल उसे घूरकर देखती है. तेरी इज्जत घट जायेगी ये बताने से कि मुझसे पिटा है, इसलिए.
राघव धीरे से कहता है हां....
जिनके सामने तेरी इज्जत घट जायेगी तू मुझे बताइयो मैं उन्हें भी एक रहपटा लगा दूंगी. फिर सबकी इज्जत एक सी हो जायेगी. ठीक?
राघव मन ही मन सोच रहा है कि कैसे काजल को मनाये....
अच्छा सुन, अगर तू किसी को नहीं बतायेगी तो मैं तुझे इमली वाली गोलियां दूंगा.
अच्छा....और?
काजल चलते-चलते पूछती है.
और बिस्कुट....
और? काजल फिर पूछती है...
और ऑरेंज वाली टॉफी. देख इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं दे सकता. हां...राघव खिसिया गया.
अबे, तेरी इज्जत का सवाल है. इमली की गोली, ऑरेंज वाली टॉफी और बिस्किुट भर की है तेरी इज्जत? काजल ने व्यंग्य किया.
राघव ने मुंह फुला लिया.
अच्छा चल नहीं बताउंगी. तू घर जाते वक्त मेरा बस्ता भी उठायेगा.
ठीक. राघव ने कहा.
मेरी बात मानेगा. काजल कहती है
ठीक. राघव कहता है.
अब से तेरी इज्जत मेरे हाथ में सुरक्षित है. काजल मुस्कुराती है.
गुरू जी ने विज्ञान की कक्षा हेतु जिन बच्चों से जंगल से किसी खास पेड़ की पत्ते मंगवाये थे उनमें काजल सबसे पहले लौटी थी.
राघव, कपिल, घुग्घू तो वहां तक गये ही नहीं.
सौरभ पहुंचा जरूर लेकिन देर से.
गुरू जी काजल को देखकर मुस्कुराए....
शाबास! लाओ पत्तियां यहां रख दो.
राघव, तुम भी यहां रख दो अपनी पत्तियां.
ना...गुरूजी हम ना लाये...हम ना...गिर पड़े रस्ते में सो ला ना पाये...जो गिरते ना तो पक्का ले आते. देखो कपड़ा भी मैले हो गये गिरने से.
काजल फिस्स...से हंस दी. राघव ने उसे घूरा...
गुरूजी अगली बार हम पक्का लेकर आयेंगे. तब तक सौरभ, कपिल और घुग्घू भी कक्षा में आ गये. सिर्फ सौरभ के हाथ में पत्ते थे.
गुरूजी ने काजल के सबसे पहले काम पूरा करने के लिए पूरी कक्षा को तालियां बजाने को कहा. साथ ही उन्होंने राघव को बुलाकर कहा, बेटा मुझे पता है तुम गिरे नहीं थे. तुम्हें काजल ने मारा था.
पूरी कक्षा के सामने एक लड़की के हाथ पिटने की बात स्वीकार करते हुए राघव को आंसू आ गये. उसने काजल की ओर देखा. काजल ने इशारे से कहा कि उसने नहीं बताया गुरूजी को.
गुरू जी ने कहा, मैंने तुम दोनों की बातें सुन ली थीं. उन्होंने काजल को भी डांट लगाई. और पूरी कक्षा से कहा,
बच्चो कोई भी काम न लड़कों का है न लड़कियों का. कोई भी क्षमता और इच्छा से सधता है. इसलिए अगर काजल जंगल में जाकर पत्तियां ला सकती है तो राघव मीठा गीत गा सकता है. और राघव, जब कपिल और सौरभ से पिटकर तुम्हारी इज्जत नहीं घटती सिर्फ दर्द होता है तो काजल से पिटकर इज्जत क्यों घटती है. क्योंकि वो लड़की है. यह गलत बात है. पीटना या पिटना अपने आप में गलत बात है, लड़का हो या लड़की. समझे? उन्होंने राघव से कहा, जी गुरू जी.
और काजल अब तुम किसी को नहीं पीटोगी.
जी गुरू जी.....काजल ने धीरे से कहा.

(उत्तराखंड के जेंडर मॉड्यूल में पठन सामग्री के तौर पर शामिल )

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

सब बराबर हैं, भिन्नता ढूढ़ना तो कठिन है।