Monday, November 26, 2012

जिंदगी की सलाखें बड़ी मजबूत हैं


5 नवंबर
दिन को पकड़ने को हाथ बढ़ाया तो शाम के आंचल का कोना ही हाथ लगा. वो भी जल्दी ही सरक गया...सर्द गहराती रातों को आने की बड़ी जल्दी रहती है... बड़े से विंडो ग्लास के बाहर मौसम कैसा ठहरा सा था. इत्मीनान से शाख पर रखे पत्ते मानो कोहरे की खुशबू में नहाने को बेताब हों...सिरहाने रखे चिनार के पत्तों पर नमी सी रखी है हालांकि कमरे में ओस का कोई कतरा भी नहीं.

6 नवंबर
जब हम जागे तो मुट्ठियों में सुबह छुपी हुई थी. बारामूला और गुलमर्ग...मुझे क्या याद रहा. रास्ते...रास्ते...रास्ते...पथिकों को रास्तों से प्यार न होगा तो किससे होगा. एक बार फिर खुद को रास्तों के हवाले करना. गुलमर्ग रास्ते भर पुकारता रहा 'आ जाओ... ' इतने खूबसूरत रास्ते कि इन्हीं रास्तों में रह जाने को दिल चाहे. न भूख न प्यास...ज्यों-ज्यों आगे बढ़ते जाते बर्फ से ढंकी पहाडि़यां और करीब आती जाती, खामोश जंगलों के बीच से गुजरते हुए हम सब कितने खामोश थे. हम सब...एक से धरातल पर. सबको पता है कि खामोशी के राग की तासीर कैसी होती है. मैं किसी ईश्वर को नहीं जानती लेकिन कुदरत के करीब जाते हुए महसूस कर पाती हूं उन आंसुओं की नमी को जो प्रार्थना या दुआ के वक्त ढुलक आते होंगे...' मुझे मुझसे मुक्त करो...' ऐसे ही बुदबुदा उठे थे होंठ...शायद यही मेरी प्रार्थना का ढंग है...गुलमर्ग की दिल लुभाने वाली खूबसूरती को देखते हुए अचानक सिहरन सी हुई. कोई आवाज कानों से टकराई...'अभी रिहाई का वक्त नहीं आया.' किसने कहे होंगे ये शब्द ...दूर-दूर तक तो कोई नहीं था. हां, सामने बर्फ से ढंकी चोटी के ठीक उपर चमकता सूरज पल भर को छुप गया था...सिर्फ पल भर को. जिंदगी की सलाखें बड़ी मजबूत हैं.
जारी...

7 comments:

अरुण चन्द्र रॉय said...

badhiya sansmaran.

Rajesh Kumari said...

बहुत सुन्दर संस्मरण यादें तरोताजा हो रही हैं

वन्दना said...

सुन्दर संस्मरण

प्रवीण पाण्डेय said...

कश्मीर पर सूरज भी मुग्ध है, दुर्भाग्य भी।

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (28-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

प्रतिभा सक्सेना said...

काव्यमय वर्णन बहुत अच्छा लगा!

indiantopblogs.com said...



प्रिय ब्लॉगर मित्र,

हमें आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है साथ ही संकोच भी – विशेषकर उन ब्लॉगर्स को यह बताने में जिनके ब्लॉग इतने उच्च स्तर के हैं कि उन्हें किसी भी सूची में सम्मिलित करने से उस सूची का सम्मान बढ़ता है न कि उस ब्लॉग का – कि ITB की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगों की डाइरैक्टरी अब प्रकाशित हो चुकी है और आपका ब्लॉग उसमें सम्मिलित है।

शुभकामनाओं सहित,
ITB टीम

पुनश्च:

1. हम कुछेक लोकप्रिय ब्लॉग्स को डाइरैक्टरी में शामिल नहीं कर पाए क्योंकि उनके कंटैंट तथा/या डिज़ाइन फूहड़ / निम्न-स्तरीय / खिजाने वाले हैं। दो-एक ब्लॉगर्स ने अपने एक ब्लॉग की सामग्री दूसरे ब्लॉग्स में डुप्लिकेट करने में डिज़ाइन की ऐसी तैसी कर रखी है। कुछ ब्लॉगर्स अपने मुँह मिया मिट्ठू बनते रहते हैं, लेकिन इस संकलन में हमने उनके ब्लॉग्स ले रखे हैं बशर्ते उनमें स्तरीय कंटैंट हो। डाइरैक्टरी में शामिल किए / नहीं किए गए ब्लॉग्स के बारे में आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा।

2. ITB के लोग ब्लॉग्स पर बहुत कम कमेंट कर पाते हैं और कमेंट तभी करते हैं जब विषय-वस्तु के प्रसंग में कुछ कहना होता है। यह कमेंट हमने यहाँ इसलिए किया क्योंकि हमें आपका ईमेल ब्लॉग में नहीं मिला। [यह भी हो सकता है कि हम ठीक से ईमेल ढूंढ नहीं पाए।] बिना प्रसंग के इस कमेंट के लिए क्षमा कीजिएगा।