Saturday, September 18, 2010

रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर


वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे
मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे

रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर
ये और बात मेरी ज़िन्दगी वफ़ा न करे

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में
ख़ुदा किसी से किसी को मगर जुदा न करे

सुना है उसको मोहब्बत दुआयें देती है
जो दिल पे चोट तो खाये मगर गिला न करे

ज़माना देख चुका है परख चुका है उसे
"क़तील" जान से जाये पर इल्तजा न करे.

- क़तील शिफ़ाई

6 comments:

अनिल कान्त : said...

वाह !

anoop joshi said...

thanks ma'm katil saab ki najb ke liye,,,,,,,

संजय भास्कर said...

वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

mashu said...

bahut khoobshorat

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

क़तील शिफ़ाई की सुन्दर नज़्म पढ़वाने के लिए धन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत खूब।