Tuesday, November 10, 2009

एक मौसम खिल रहा है..

एक मौसम आसमान से उतर रहा था। एक मौसम शाखों पर खिल रहा था। एक मौसम पहाड़ों से उतर रहा था। एक मौसम रास्तों से गुजर रहा थाएक मौसम शानों पर बैठ चुका था कबका। एक मौसम आंखों में उतर रहा था आहिस्ता-आहिस्ता।
एक मौसम दहलीज पर बैठा था अनमना सा, एक मौसम साथ चल रहा था हर पल। न धूप... न छांव...न बूंदें... न ओस...न बसंत...न शरद बस एक याद ही है जो हर मौसम में ढल रही हैऔर लोग कह रहे हैं कि मौसम बदल रहे हैं...

11 comments:

ओम आर्य said...

आपका लेख पढकर एक ही शब्द निकला वह यह है .............वाह!!!!!!!!!!!!!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत खूबसूरत है यह बदलाव।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

दिगम्बर नासवा said...

VAAH ..... HAR MOUSAM MEIN EK YAAD HI DHAL RAHI THEE ....
BAHOOT LAJAWAAB ......

काजल कुमार Kajal Kumar said...

:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...
This comment has been removed by the author.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत खूब.........!
मौसम का बढ़िया विश्लेषण किया है!

rohit said...

Ne dhoop,ne chav,ne bude,ne oose,ne basant,ne sharad- bas ek yaad hi hai jo har mausam mein dhal rahi hai.

Bahut Sunder

Krishna Kumar Mishra said...

दुनिया में कुछ भी अपरिवर्तनीय नही है!

बहुत खूब

jyoti nishant said...

anmana sa mausam jitna khubsurat hai utna hi khatakta hai uska dahleej per baithe rhna.use bhi bheeter uterne deejiye.ho sakta hai who mausam aapke liye nayi kavita ban ker aaye.

tanu sharma.joshi said...

beautiful...!!

संजय भास्कर said...

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।