Tuesday, September 22, 2009

लोहे का स्वाद- धूमिल

लोहे का स्वाद
लोहार से मत पूछो
उस घोड़े से पूछो
जिसके मुंह में है लगाम
- धूमिल

9 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

Nice Article...thank you..

sudhakar soni,cartoonist said...

badhiya

अमिताभ मीत said...

Sahi hai !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

लोहे का स्वाद
लोहार से मत पूछो
उस घोड़े से पूछो
जिसके मुंह में है लगाम

धूमिल जी।
इसमें यह और जोड़ देता हूँ-
जिसके मुंह में है लगाम
और खुरों में नाल।
बहुत बधाई!

सुशीला पुरी said...

waah kya baat hai ......

Udan Tashtari said...

आभार धूमिल जी की रचना पढ़वाने का.

Mithilesh dubey said...

बहुत ही खुब ,,,,,,,,,

Kishore Choudhary said...

सुंदर संयोग है
सब मेरी रूचि के लेखक मिलते हैं यहाँ, आपका आभार !

rohit said...

kya bat hai

Rohit Kaushik