Friday, April 3, 2009

दुनिया के मशहूर प्रेम पत्र - 5

जोनेथन स्विफ्ट को कुमारी वेनेसा का पत्र (कैम्ब्रिज १७२० )
(जोनेथन स्विफ्ट: जिसने भ्रमण साहित्य की विश्वप्रसिद्ध पुस्तक गुलिवर की यात्राएं लिखी। मगर जिसकी स्वयं की जीवन यात्रा का दु:खद अंत पागलखाने में हुआ)
प्रिय,
यकीन मानो, यह बड़े ही दु:ख की बात है कि आज मुझे तुमसे शिकायत करनी पड़ रही है क्योंकि मैं जानती हूं कि तुम्हारा स्वभाव इतना अच्छा है कि किसी भी मनुष्य को दु:खी देखकर तुम्हारा दिल रोए बिना नहीं रह सकता। फिर भी मैं क्या करूं। मुझे अपने दिल को खाली करना पड़ेगा और अपने दु:ख तुमसे कहने पड़ेंगे, नहीं तो मैं तुम्हारी इस अजीब उपेक्षा की अकथनीय पीड़ा के नीचे घुट-घुटकर मर जाऊंगी। दस लंबे सप्ताह बीत चुके हैं, जब मैं तुमसे मिली थी और इसके बीच एक पत्र और बहाने भरी दो पंक्तियों के सिवा कुछ भी तो मुझे तुमसे नहीं मिला। आह! कैसे मुझे तुम खुद से दूर रखने के बारे में सोच भी पाते हो। मेरे शरीर के रोम-रोम से तुम्हारा प्यार छलक रहा है। मैं तुम्हारे बिना इतनी बेचैन हूं कि लगता है अब जी नहीं पाऊंगी।भगवान के लिए बताओ कि किस बात ने यह अजीब परिवर्तन तुममें पैदा किया है। नहीं, मत बताओ क्योंकि अगर मेरा वहम कि तुम मुझे प्यार करते हो भी अगर टूट गया तो मेरा जिंदा रहना सचमुच मुश्किल हो जायेगा। मुझे तो अब ऐसी ही जिंदगी जीने की आदत डालनी है. ओह यह क्रूर जीवन.
वेनेसा
(स्विफ्ट के जीवन में एक दूसरी स्त्री एस्थर जॉनसन थी. इन तीनों को लेकर अंग्रेजी में काफी साहित्य लिखा गया. )

सोफिया का पत्र कोनिग्समार्क के नाम
(सोफिया: इंग्लैंड की वह बेताज रानी, जिसे कारण जॉर्ज प्रथम को गद्दी मिली, पर स्वयं उसको मिला एकांतवास का क्रूरतम दंड व अपने प्रेमी का कटा हुआ सिर...)
प्यारे हनोवर,
मैंने रात के सन्नाटे को बिना सोए गुजारा और सारा दिन तुम्हारे बारे में सोचते हुए और अपने वियोग पर आंसू बहाकर बिताया। दिन मुझे कभी इतना लंबा महसूस नहीं हुआ था। मैं नहीं जानती थी कि तुम्हारी अनुपस्थिति को मैं किस प्रकार सह पाऊंगी? तुम्हारे न होने पर दुनिया की कोई चीज मुझे सुख नहीं दे पाती। बड़े से बड़ा संकट मेरे प्यार से छोटा ही होगा ऐसा मुझे विश्वास है। मेरा स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। कमजोरी बढ़ती जा रही है। मुझसे अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने की हिदायतें देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन मुझे पता है मेरी बीमारी सिर्फ यह है कि मैं तुमसे प्यार करती हूं और तुम मेरे पास नहीं हो. और मैं दिल से चाहती हूं कि मैं हमेशा ही बीमार रहूं. मुझे तुमसे, तुम्हारी यादों से सिर्फ मौत ही अलग कर सकती है. अब मैं पत्र लिखना बंद करती हूं.
तुम्हारी वफादार
सोफिया

प्रेम पत्रों का सिलसिला जारी....

6 comments:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

इन प्रेम पत्रों को यहां प्रस्‍तुत करने के लिए आभार । दरअसल, मैं इनमें अपने पत्र का जवाब ढूंढ रहा हूं ।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

प्रेम पत्रों को यहां प्रस्‍तुत करने के लिए आभार

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया ... शुक्रिया।

विनय said...

पत्र पढ़कर बहुत नया अनुभव हुआ!

Udan Tashtari said...

आभार इस दिलचस्प श्रृंखला को शुरु करने का. अच्छा लगा पढ़कर.

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

बहुत अच्छी लेखमाला ..जारी रखें हम पढ़ रहे हैं.

कृपया वर्ड वेरिफिकसें हटा दे टिप्पणी करने में आसानी होगी