Thursday, April 2, 2009

दुनिया के मशहूर प्रेम पत्र - 4

बहुत शुक्रिया आप सबका मेरी छोटी सी कोशिश को सराहने का। थोड़े से अन्तराल के लिए माफ़ी चाहती हूँ। प्रेम अधीर होता है, तो प्रेम पत्रों को पढने को लेकर अधीरता भी जायज है। आइये रु-ब-रु होते हैं कुछ और धड़कते हुए अल्फाजों से....

नेपोलियन का पत्र डिजायरी के नाम
(नेपोलियन: जिसने प्यार और युद्ध दोनों में मैदान जीते...असंभव शब्द जिसके कोश में नहीं था...वही प्यार के सम्मुख किस तरह घुटने टेककर गिड़गिड़ाता है)
प्रिये,
मैं एविग्नान बहुत ही उदास मन लेकर पहुंचा हूं क्योंकि इतनी दिनों तक मुझे तुमसे अलग रहना पड़ा है। यह यात्रा मुझे बहुत ही कठिन लगी है। मेरी प्यारी अकसर अपने प्रिय की याद करती होगी और जैसा कि उसने वादा किया है, वह उसे प्यार करती रहेगी। बस, यही आस मेरे दु:ख को कम कर सकती है और मेरी स्थिति को थोड़ा बेहतर बना देती है।मुझे तुम्हारा कोई भी पत्र पेरिस पहुंचने से पहले नहीं मिल पायेगा। यह बात मुझे प्रेरित करेगी कि मैं और तेज भागूं और वहां पहुंचकर देखूं कि तुम्हारे समाचार मेरा इंतजार कर रहे हैं।ड्यूरेंस में बाढ़ आ जाने के कारण मैं इस जगह पर जल्दी नहीं पहुंच सका. कल शाम तक मैं लियंस पहुंच जाऊंगा. मेरी प्यारी! मेरी रानी, विदा. मुझे कभी भी भूलना मत. हमेशा उसे प्यार करती रहना जो जीवन-भर के लिए तुम्हारा है.
नेपोलियन बोनापार्ट

दोस्तोएवस्की का पत्र ऐना के नाम
(दोस्तोवस्की: विश्व का बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार, जिसको राजद्रोह के अपराध में मृत्युदंड दे दिया गया, पर ठीक फांसी के समय पर वह दंड सात साल के साइबेरिया से निष्कासन में परिवर्तित कर दिया गया)
प्रिये,
तुम लिखती हो- मुझे प्यार करो! पर क्या मैं तुम्हें प्यार नहीं करता? असल बात यह है कि ऐसा शब्दों में कहना मेरी प्रवृत्ति के खिलाफ है। तुमने खुद भी इसे महसूस किया होगा लेकिन अफसोस तुम महसूस करना जानती ही नहीं अगर जानती होती, तो ऐसी शिकायत कभी नहीं करती।मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूं अब तक तुम्हें पता होना चाहिए था लेकिन तुम कुछ समझना नहीं चाहतीं। मैं अभिव्यक्तियों में विश्वास नहीं करता महसूस करने में करता हूं. अब यह भाषणनुमा पत्र लिखना बंद कर रहा हूं. तुम्हारे पैरों की उंगलियों का चुंबन लेने के लिए मैं तड़प रहा हूं. तुम कहती हो कि अगर कोई हमारे पत्र पढ़ ले तो क्या हो? ठीक है, पढऩे दो लोगों को और जलन महसूस करने दो।
हमेशा तुम्हारा
दोस्तोएवस्की

प्रेम पत्रों का सिलसिला जारी...

4 comments:

दिल का दर्द said...

मेरी प्यारी! मेरी रानी, विदा. मुझे कभी भी भूलना मत. हमेशा उसे प्यार करती रहना जो जीवन-भर के लिए तुम्हारा है.

अपनी प्रिये के लिए कितनी तड़प है. इसी को सच्चा प्यार कहते हैं. बस एक बार अपने प्यार से मिल लेने की तड़प इस को सर्फ वही समझ सकता है जिसने सच्चा प्यार किया हो.

हिमांशु । Himanshu said...

नेपोलियन के व्यक्तित्व का अछूता पहलू ।
प्रेम सब को दास बना कर छोडता है । धन्यवाद ।

विनीता यशस्वी said...

bahut achha...

Nikhil Srivastava said...

Dil ke mamle me sabka yahi haal rahta hai. दोस्तोएवस्की jaisa hi hum bhi sochte hain. Halanki shayad ye andaaz aajkal old fashioned ho chuka hai. par apna to yahi tarika hai. Sach kahein to aaj tak hum kabhi prem patra nahin likh paye.