Friday, February 20, 2009

पहचान



नाजुक वक़्त ही नाजुक नहीं होता। कभी-कभी कहीं से इतनी पहचान मिले, इतना प्यार मिले तो वह वक़्त भी उतना ही नाजुक होता है की आँखों की कोरें भिगो सकता है।

- मरीना

2 comments:

Manoj dwivedi said...

Emotional kar diya apne

अखिलेश्‍वर पांडेय said...

हर बार कोई फूल या गुलदस्‍ता आपकी पोस्‍ट को और ताजा बना देता है। आपकी इस नई पोस्‍ट की पंक्तियां इस गुलदस्‍ते से भी फेश हैं।