Friday, December 19, 2008

एक तुम्हारा होना


एक तुम्हारा होना

क्या से क्या कर देता है

बेजुबान छत दीवारों को

घर कर देता है

खाली शब्दों में

आता है

ऐसा अर्थ पिरोना

गीत बन गया सा

लगता है

घर का कोना कोना

एक तुम्हारा होना

सपनों को स्वर देता है

आरोहों अवरोहों से

समझाने

लगती है

तुमसे जुड़कर

चीज़ें भी

बतियाने लगाती है

एक तुम्हारा होना

अपनापन भर देता है

एक तुम्हारा होना

क्या से क्या कर देता है

..... ...... ........ ........ .............

3 comments:

Saurabh Suman said...

Kya baat hai. Tussi to bus chaa gaye ho. Likhiye, likhiye aur khoob likhiye. Kavitaon ke alawa kuch lekh ya anaya gadya hon, to padhna accha lagega. Nice blog.

Anonymous said...

kisi ke hone ka eahsah hona bhi bahut kuchh hota hai phir ye to mujudagi hai bahut achha likha hai

Vaanbhatt said...

निश्चय ही कुछ लोग जीवन में इतना महत्त्व रखते हैं...